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अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् |
antakāle ca māmeva smaranmuktvā kalevaram .
और जो कोई पुरुष अन्तकाल में मुझे ही स्मरण करता हुआ शरीर को त्याग कर जाता है, वह मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है, इसमें कुछ भी संशय नहीं।।
जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः |
janma karma ca me divyamevaṃ yo vetti tattvataḥ .
हे अर्जुन ! मेरा जन्म और कर्म दिव्य है, इस प्रकार जो पुरुष तत्त्वत: जानता है, वह शरीर को त्यागकर फिर जन्म को नहीं प्राप्त होता; वह मुझे ही प्राप्त होता है।।
अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते |
ananyāścintayanto māṃ ye janāḥ paryupāsate .
अनन्य भाव से मेरा चिन्तन करते हुए जो भक्तजन मेरी ही उपासना करते हैं, उन नित्ययुक्त पुरुषों का योगक्षेम मैं वहन करता हूँ।।
क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति |
kṣipraṃ bhavati dharmātmā śaśvacchāntiṃ nigacchati .
हे कौन्तेय, वह शीघ्र ही धर्मात्मा बन जाता है और शाश्वत शान्ति को प्राप्त होता है। तुम निश्चयपूर्वक सत्य जानो कि मेरा भक्त कभी नष्ट नहीं होता।।
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज |
sarvadharmānparityajya māmekaṃ śaraṇaṃ vraja .
सब धर्मों का परित्याग करके तुम एक मेरी ही शरण में आओ, मैं तुम्हें समस्त पापों से मुक्त कर दूँगा, तुम शोक मत करो।।