Anvayaअन्वय

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BG 2.11Bhagavad Gītā · ch. 2

श्रीभगवानुवाच |

śrībhagavānuvāca .

श्री भगवान् ने कहा -- (अशोच्यान्) जिनके लिये शोक करना उचित नहीं है, उनके लिये तुम शोक करते हो और ज्ञानियों के से वचनों को कहते हो, परन्तु ज्ञानी पुरुष मृत (गतासून्) और जीवित (अगतासून्) दोनों के लिये शोक नहीं करते हैं।।

GriefSufferingDetachment
BG 2.14Bhagavad Gītā · ch. 2

मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः |

mātrāsparśāstu kaunteya śītoṣṇasukhaduḥkhadāḥ .

हे कुन्तीपुत्र ! शीत और उष्ण और सुख दुख को देने वाले इन्द्रिय और विषयों के संयोग का प्रारम्भ और अन्त होता है;  वे अनित्य हैं,  इसलिए,  हे भारत ! उनको तुम सहन करो।।

SufferingEnduranceEquanimityPatience
BG 1.46Bhagavad Gītā · ch. 1

यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः |

yadi māmapratīkāramaśastraṃ śastrapāṇayaḥ .

यदि मुझ शस्त्ररहित और प्रतिकार न करने वाले को ये शस्त्रधारी कौरव रण में मारें,  तो भी वह मेरे लिये कल्याणकारक होगा।

GriefSuffering