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BG 8.5Bhagavad Gītā · ch. 8
अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् |
antakāle ca māmeva smaranmuktvā kalevaram .
और जो कोई पुरुष अन्तकाल में मुझे ही स्मरण करता हुआ शरीर को त्याग कर जाता है, वह मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है, इसमें कुछ भी संशय नहीं।।
MortalityHopeDeath
BG 2.27Bhagavad Gītā · ch. 2
जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च |
jātasya hi dhruvo mṛtyurdhruvaṃ janma mṛtasya ca .
जन्मने वाले की मृत्यु निश्चित है और मरने वाले का जन्म निश्चित है; इसलिए जो अटल है अपरिहार्य - है उसके विषय में तुमको शोक नहीं करना चाहिये।।
MortalityDeath