Anvayaअन्वय

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BG 5.2Bhagavad Gītā · ch. 5

श्रीभगवानुवाच |

śrībhagavānuvāca .

श्रीभगवान् ने कहा --  कर्मसंन्यास और कर्मयोग ये दोनों ही परम कल्याणकारक हैं;  परन्तु उन दोनों में कर्मसंन्यास से कर्मयोग श्रेष्ठ है।।

DutyDetachmentAction
BG 3.9Bhagavad Gītā · ch. 3

यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः |

yajñārthātkarmaṇo.anyatra loko.ayaṃ karmabandhanaḥ .

यज्ञ के लिये किये हुए कर्म के अतिरिक्त अन्य कर्म में प्रवृत्त हुआ यह पुरुष कर्मों द्वारा बंधता है इसलिए हे कौन्तेय आसक्ति को त्यागकर यज्ञ के निमित्त ही कर्म का सम्यक् आचरण करो।।

DutyPurposeAction
BG 6.12Bhagavad Gītā · ch. 6

तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः |

tatraikāgraṃ manaḥ kṛtvā yatacittendriyakriyaḥ .

वहाँ (आसन में बैठकर) मन को एकाग्र करके, चित्त और इन्द्रियों की क्रियाओं को वश में किये हुये आत्मशुद्धि के लिए योग का अभ्यास करे।।

DisciplinePeaceAction
BG 2.47Bhagavad Gītā · ch. 2

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन |

karmaṇyevādhikāraste mā phaleṣu kadācana .

कर्म करने मात्र में तुम्हारा अधिकार है? फल में कभी नहीं। तुम कर्मफल के हेतु वाले मत होना और अकर्म में भी तुम्हारी आसक्ति न हो।।

DutyAnxietyDetachmentAction