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अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् |
antakāle ca māmeva smaranmuktvā kalevaram .
और जो कोई पुरुष अन्तकाल में मुझे ही स्मरण करता हुआ शरीर को त्याग कर जाता है, वह मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है, इसमें कुछ भी संशय नहीं।।
देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा |
dehino.asminyathā dehe kaumāraṃ yauvanaṃ jarā .
जैसे इस देह में देही जीवात्मा की कुमार, युवा और वृद्धावस्था होती है, वैसे ही उसको अन्य शरीर की प्राप्ति होती है; धीर पुरुष इसमें मोहित नहीं होता है।।
न जायते म्रियते वा कदाचिन्
na jāyate mriyate vā kadācin nāyaṃ bhūtvā bhavitā vā na bhūyaḥ .
यह आत्मा किसी काल में भी न जन्मता है और न मरता है और न यह एक बार होकर फिर अभावरूप होने वाला है। यह आत्मा अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है, शरीर के नाश होने पर भी इसका नाश नहीं होता।।
जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च |
jātasya hi dhruvo mṛtyurdhruvaṃ janma mṛtasya ca .
जन्मने वाले की मृत्यु निश्चित है और मरने वाले का जन्म निश्चित है; इसलिए जो अटल है अपरिहार्य - है उसके विषय में तुमको शोक नहीं करना चाहिये।।