Anvayaअन्वय

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BG 16.19Bhagavad Gītā · ch. 16

तानहं द्विषतः क्रुरान्संसारेषु नराधमान् |

tānahaṃ dviṣataḥ krurānsaṃsāreṣu narādhamān .

ऐसे उन द्वेष करने वाले,  क्रूरकर्मी और नराधमों को मैं संसार में बारम्बार (अजस्रम्) आसुरी योनियों में ही गिराता हूँ अर्थात् उत्पन्न करता हूँ।।

EnvyDespairEgo
BG 9.31Bhagavad Gītā · ch. 9

क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति |

kṣipraṃ bhavati dharmātmā śaśvacchāntiṃ nigacchati .

हे कौन्तेय, वह शीघ्र ही धर्मात्मा बन जाता है और शाश्वत शान्ति को प्राप्त होता है। तुम निश्चयपूर्वक सत्य जानो कि मेरा भक्त कभी नष्ट नहीं होता।।

DespairHopeCompassion
BG 18.66Bhagavad Gītā · ch. 18

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज |

sarvadharmānparityajya māmekaṃ śaraṇaṃ vraja .

सब धर्मों का परित्याग करके तुम एक मेरी ही शरण में आओ, मैं तुम्हें समस्त पापों से मुक्त कर दूँगा, तुम शोक मत करो।।

DespairHopeDoubtFear