Anvayaअन्वय

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BG 16.4Bhagavad Gītā · ch. 16

दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोधः पारुष्यमेव च |

dambho darpo.abhimānaśca krodhaḥ pāruṣyameva ca .

हे पार्थ ! दम्भ, दर्प, अभिमान, क्रोध, कठोर वाणी (पारुष्य) और अज्ञान यह सब आसुरी सम्पदा है।।

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BG 3.37Bhagavad Gītā · ch. 3

श्रीभगवानुवाच |

śrībhagavānuvāca .

श्रीभगवान् ने कहा -- रजोगुण में उत्पन्न हुई यह 'कामना' है,  यही क्रोध है; यह महाशना (जिसकी भूख बड़ी हो) और महापापी है, इसे ही तुम यहाँ (इस जगत् में) शत्रु जानो।।

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BG 2.62Bhagavad Gītā · ch. 2

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते |

dhyāyato viṣayānpuṃsaḥ saṅgasteṣūpajāyate .

विषयों का चिन्तन करने वाले पुरुष की उसमें आसक्ति हो जाती है? आसक्ति से इच्छा और इच्छा से क्रोध उत्पन्न होता है।।

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BG 2.63Bhagavad Gītā · ch. 2

क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः |

krodhādbhavati sammohaḥ sammohātsmṛtivibhramaḥ .

क्रोध से उत्पन्न होता है मोह और मोह से स्मृति विभ्रम। स्मृति के भ्रमित होने पर बुद्धि का नाश होता है और बुद्धि के नाश होने से वह मनुष्य नष्ट हो जाता है।।

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