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BG 3.37Bhagavad Gītā · ch. 3
श्रीभगवानुवाच |
śrībhagavānuvāca .
श्रीभगवान् ने कहा -- रजोगुण में उत्पन्न हुई यह 'कामना' है, यही क्रोध है; यह महाशना (जिसकी भूख बड़ी हो) और महापापी है, इसे ही तुम यहाँ (इस जगत् में) शत्रु जानो।।
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BG 2.62Bhagavad Gītā · ch. 2
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते |
dhyāyato viṣayānpuṃsaḥ saṅgasteṣūpajāyate .
विषयों का चिन्तन करने वाले पुरुष की उसमें आसक्ति हो जाती है? आसक्ति से इच्छा और इच्छा से क्रोध उत्पन्न होता है।।
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